Parliament session cost: संसद का एक मिनट कितना महंगा? स्पेशल सेशन में खर्च चर्चा में, मिनटों में उड़ते हैं लाखों रुपये

✍️Amisha Sachan
Parliament session cost: संसद का एक मिनट कितना महंगा? स्पेशल सेशन में खर्च चर्चा में, मिनटों में उड़ते हैं लाखों रुपये

Parliament session cost: क्या आप जानते है देश की राजनीति का सबसे बड़ा मंच संसद है जहां देश के कई बड़े मुद्दे की चर्चा की जाती है और कई बड़े फैसले लिये जाते है। विधेयकों को मंजूरी दी जाती है लेकिन साथ ही संसद का हर सत्र आर्थिक द्दष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण और खर्चीला माना जाता है हाल ही में 16 अप्रैल को शुरु हुए विशेष सत्र को लेकर एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि संसद की एक कार्यवाही पर वास्तव में कितना पैसा आता है ।

इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल को प्रमुख एजेंडा के रूप में शामिल किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू किया जाए। इसके लिए लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े तीन अहम विधेयकों को पारित कराने की तैयारी की गई है। इस मुद्दे पर सर्वसम्मति बनाने की कोशिश भी जारी है, ताकि इसे समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।

रिपोर्ट्स के अनुसार संसद की कार्यवाही पर हर मिनट लगभग ढाई लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया जाता है। इस हिसाब से देखा जाए तो एक घंटे का खर्च करीब 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। यदि सदन पूरे दिन सुचारु रूप से चलता है, तो यह आंकड़ा लगभग 9 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक जा सकता है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है, और ये आंकड़े विभिन्न रिपोर्ट्स और अनुमान पर आधारित हैं।

संसद सत्र के दौरान होने वाला खर्च केवल सांसदों की उपस्थिति तक सीमित नहीं होता। इसमें संसद भवन के संचालन से जुड़ी कई व्यवस्थाएं शामिल होती हैं। बिजली, पानी, एयर कंडीशनिंग, भवन रखरखाव और तकनीकी सिस्टम पर लगातार खर्च होता रहता है। इसके अलावा CCTV कैमरे, डिजिटल रिकॉर्डिंग सिस्टम, लाइव टेलिकास्ट और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर भी इस खर्च का हिस्सा हैं।

सुरक्षा व्यवस्था भी संसद के खर्च का बड़ा हिस्सा होती है। संसद परिसर की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस और CRPF जैसी एजेंसियां तैनात रहती हैं। पूरे परिसर में चौबीसों घंटे निगरानी की जाती है, ताकि किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक न हो। इस व्यापक सुरक्षा व्यवस्था का खर्च भी कुल बजट में शामिल माना जाता है।

इसके अलावा सांसदों को मिलने वाला दैनिक भत्ता, कर्मचारियों का वेतन, यात्रा भत्ता, ईंधन और खानपान जैसी व्यवस्थाएं भी इस खर्च को बढ़ाती हैं। संसद की कार्यवाही को देशभर में पहुंचाने के लिए चलने वाला लाइव प्रसारण सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लगातार सक्रिय रहते हैं, जिस पर भी बड़ा खर्च आता है।

जब संसद में हंगामे की स्थिति बनती है और कार्यवाही बार-बार स्थगित होती है, तो सार्वजनिक धन का अप्रत्यक्ष नुकसान बढ़ जाता है। यही कारण है कि संसद के हर मिनट को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। एक छोटी सी देरी या व्यवधान भी करोड़ों रुपये के संसाधनों के उपयोग को प्रभावित करता है।

कुल मिलाकर, संसद का विशेष सत्र न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश के संसाधनों के उपयोग का भी बड़ा उदाहरण है। ऐसे में अपेक्षा की जाती है कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चले, ताकि समय और सार्वजनिक धन दोनों का सर्वोत्तम उपयोग हो सके।

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