TCS Nashik Case: नासिक TCS कांड में बड़ा खुलासा संभव: बैंक खातों की जांच से ‘बाहरी फंडिंग’ एंगल की पड़ताल तेज

✍️Amisha Sachan
TCS Nashik Case: नासिक TCS कांड में बड़ा खुलासा संभव: बैंक खातों की जांच से ‘बाहरी फंडिंग’ एंगल की पड़ताल तेज

TCS Nashik Case: महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ सेंटर से जुड़े कथित धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। शुरुआती जांच के बाद अब पुलिस ने मामले की गहराई तक जाने के लिए आरोपियों के बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है। इस कदम को जांच की दिशा बदलने वाला माना जा रहा है, क्योंकि अब यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि क्या इस पूरे मामले के पीछे कोई बाहरी फंडिंग या संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों के बैंक खातों का विस्तृत ब्यौरा बैंकों से मांगा गया है। इसमें उनकी सैलरी, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और अन्य स्रोतों से प्राप्त धन की जानकारी शामिल है। जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन कर्मचारियों को सिर्फ कंपनी से मिलने वाली सैलरी ही मिल रही थी या फिर कहीं और से भी आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही थी।

जांच का दायरा अब केवल व्यक्तिगत आरोपों तक सीमित नहीं रहा है। विशेष जांच टीम (SIT) अब इस संभावना पर भी काम कर रही है कि यह पूरा मामला किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इसी वजह से टीम लीडर्स और अन्य संबंधित कर्मचारियों के बैंक खातों की भी बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि किसी प्रकार की संदिग्ध फंडिंग का पता चलता है, तो मामला और गंभीर हो सकता है।

इस पूरे मामले में निदा खान का नाम एक अहम कड़ी के रूप में सामने आया है। आरोप है कि वह केवल एचआर की भूमिका तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे नेटवर्क में सक्रिय रूप से शामिल थी। हालांकि, वह फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। जांच अधिकारियों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

अब तक इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें छह पुरुष और एक महिला ऑपरेशंस मैनेजर शामिल हैं। इन सभी पर महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न, मानसिक दबाव और जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि इन आरोपियों को कंपनी द्वारा निलंबित कर दिया गया है।

मामले की शुरुआत महिला कर्मचारियों की शिकायतों से हुई थी। कुल आठ महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनके साथ मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी शिकायतों को समय पर गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे आरोपियों के हौसले बढ़े। इस कारण एचआर विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया हुआ था, जिसके माध्यम से कर्मचारियों को टारगेट किया जाता था। पीड़ितों का आरोप है कि इस ग्रुप में उनके ऊपर धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने का दबाव बनाया जाता था। कुछ मामलों में जबरन नमाज पढ़ने और धार्मिक प्रतीकों को अपनाने के लिए मजबूर करने के आरोप भी लगे हैं।महिला कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न के कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इनमें अश्लील टिप्पणियां, अनुचित व्यवहार, जबरन नजदीकी बनाने की कोशिश और व्यक्तिगत जीवन में दखल जैसे मामले शामिल हैं। कुछ पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें शादी का झांसा देकर संबंध बनाने की कोशिश की गई।

मामले के सामने आने के बाद TCS ने स्पष्ट किया है कि कंपनी किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाती है। कंपनी ने आरोपियों के निलंबन की पुष्टि करते हुए कहा है कि इस पूरे मामले की आंतरिक जांच भी की जा रही है। टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इस घटना को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।फिलहाल, SIT की जांच जारी है और बैंक खातों की जांच को इस केस में अहम कड़ी माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत स्तर का था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।

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