कानपुर में आवारा कुत्तों का आतंक: युवती पर हुआ भयानक हमला, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में आवारा कुत्तों का आतंक दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। हाल ही में बर्रा इलाके में 20 वर्षीय निकिता कुशवाहा पर एक भयानक हमला हुआ, जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। जानकारी के अनुसार, निकिता किदवई नगर स्थित तुलसीयांन टेक्सटाइल कंपनी में काम करती हैं। ऑफिस से निकलने के बाद जब वह सचान चौराहे पर ऑटो से उतर रही थीं और दूसरे ऑटो में बैठने के लिए बढ़ीं, तभी अचानक एक आवारा कुत्ता उन पर झपटा।कुत्ते ने युवती के सीने पर पैर रखकर उसके होंठों पर जोरदार हमला किया। आसपास खड़े लोगों ने किसी तरह कुत्ते को भगाया, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। इस हमले में युवती बुरी तरह घायल हो गई, उसके होंठ फट गए और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं।

अस्पताल में इलाज और परिवार की दुविधा
निकिता के माता-पिता गरीब हैं और उन्हें सरकारी अस्पताल में एडमिशन से मना कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी को बर्रा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उसके होंठों की सर्जरी की। फिलहाल युवती अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज जारी है। परिवार आर्थिक और मानसिक दोनों तरह के संकट से जूझ रहा है।
परिवार के गंभीर आरोप
निकिता के परिवार का आरोप है कि नगर निगम और स्थानीय प्रशासन अगर आवारा कुत्तों पर सख्ती से ‘कैचिंग दस्ते’ का अभियान चलाते, तो शायद यह घटना नहीं होती। स्थानीय निवासी भी मानते हैं कि आवारा कुत्तों की समस्या केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का गंभीर खतरा बन चुकी है।
मां की चिंता और भविष्य की चुनौतियाँ
निकिता की मां कहती हैं, “बेटी रोज ऑफिस जाती है और घर चलाती है। अब उसके चेहरे पर निशान रह जाएगा और खाने-पीने में भी तकलीफ होगी। हम गरीब लोग महंगा इलाज कहां से कराएं?” परिवार अब पूर्ण स्वस्थ होने तक युवती की देखभाल कर रहा है।
कानपुर में आवारा कुत्तों के हमलों की लंबी सूची
यह घटना कानपुर में अकेली नहीं है। मार्च 2026 में जाजमऊ के मनोहर नगर में 12 वर्षीय आरिश आलम पर कुत्तों के झुंड ने हमला किया। बच्चे को घेरकर नोच लिया गया, हाथ-पैर में गहरे घाव आए और हाथ में 10 टांके लगे। उसी महीने कल्याणपुर के शिवली रोड बाजार में एक युवती पर भी आवारा कुत्ते ने हमला किया।अगस्त 2025 में श्याम नगर इलाके में बीबीए की 21 वर्षीय वैष्णवी साहू पर तीन आवारा कुत्तों ने सामूहिक हमला किया। छात्रा के गाल दो हिस्सों में फट गए, नाक कट गई और चेहरे पर 17 टांके लगे।
कानपुर में आवारा कुत्तों की स्थिति
शहर में अनुमानित 1.30 लाख से अधिक आवारा कुत्ते हैं। नगर निगम समय-समय पर इन्हें पकड़ने और नसबंदी (ABC) अभियान चलाता है, लेकिन जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। चौराहों, बाजारों और आवासीय इलाकों में खूंखार कुत्ते बेखौफ घूमते हैं। हाल ही में प्रशासन ने दो बार काटने वाले कुत्तों को आजीवन ABC सेंटर में रखने का निर्णय लिया है, लेकिन आम लोगों का कहना है कि अमल बहुत धीमा है।
सार्वजनिक सुरक्षा पर सवाल
इन घटनाओं ने एक बार फिर सवाल उठाया है कि कानपुर नगर निगम कब तक सिर्फ कागजों पर अभियान चलाएगा? सड़कों पर घूम रहे खतरनाक आवारा कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी करने और उन्हें सुरक्षित जगह शिफ्ट करने के लिए सख्त और निरंतर अभियान की जरूरत है।विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या केवल स्वास्थ्य या नसबंदी का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और मानसिक आघात से जुड़ी गंभीर चुनौती है। शहर के हर चौराहे पर मासूमों की जान खतरे में पड़ सकती है यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।
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