Kanpur Kidney Racket: कानपुर में करोड़ों रुपये के किडनी रैकेट का पर्दाफाश, ₹50,000 के विवाद में हुआ खुलासा

✍️Amisha Sachan
Kanpur Kidney Racket: कानपुर में करोड़ों रुपये के किडनी रैकेट का पर्दाफाश, ₹50,000 के विवाद में हुआ खुलासा

कानपुर – शहर में एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसकी शुरुआत 50,000 रुपये के भुगतान विवाद से हुई। पुलिस ने रावतपुर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल से जुड़े इस रैकेट की जांच शुरू की, जिसमें गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को निशाना बनाकर किडनी को लाखों रुपये में बेचा गया।

किडनी रैकेट की शुरुआत

मामला उस समय सामने आया जब एक डोनर ने शिकायत की कि उसे 10 लाख रुपये देने का वादा किया गया था, लेकिन केवल 50,000 रुपये कम दिए गए और शेष राशि देने में लगातार देरी की जा रही थी। डोनर की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और अस्पताल संचालक तथा कथित बिचौलियों सहित 4-5 लोगों को हिरासत में लिया।जांच में सामने आया कि शिवम अग्रवाल ने उत्तराखंड के एक युवक को 10 लाख रुपये का लालच देकर फंसाया। युवक, जो आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, ने किडनी देने की सहमति दे दी। इसके बाद रावतपुर के एक निजी अस्पताल में उसकी किडनी निकाली गई।

किडनी की बिक्री और भुगतान

निकाली गई किडनी को मुजफ्फरनगर की 35 वर्षीय महिला के परिवार को 90 लाख रुपये से अधिक में बेच दिया गया। डोनर को केवल 6 लाख रुपये नकद और 3.5 लाख रुपये चेक के जरिए दिए गए।

तीन अस्पतालों का इस्तेमाल

जांचकर्ताओं के अनुसार, रैकेट ने पकड़े जाने से बचने के लिए तीन अलग-अलग अस्पतालों का इस्तेमाल किया। पहला अस्पताल अंग निकालने के लिए, दूसरा डोनर की सर्जरी के बाद की देखभाल के लिए और तीसरा मरीज के इलाज के लिए। इस तरह किसी भी एक अस्पताल के पास पूरी जानकारी नहीं रही।सूत्रों के अनुसार, डोनर को अलग पहचान के तहत दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि मरीज को कहीं और रखा गया। इस रणनीति से रैकेट अपनी हरकतों को छुपाने में सफल रहा।

गंभीर कानूनी और सामाजिक पहलू

यह मामला अवैध अंग तस्करी की गंभीरता को उजागर करता है। गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोग लालच और मजबूरी में इस तरह के रैकेट का शिकार बनते हैं। कानून के अनुसार अवैध किडनी ट्रांसप्लांट गंभीर अपराध है और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे रैकेटों को पकड़ने के लिए अस्पतालों की निगरानी, डोनर और मरीजों की रिकॉर्डिंग, और स्थानीय प्रशासन का सक्रिय सहयोग जरूरी है।

जांच और आगे की कार्रवाई

पुलिस अब सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और रैकेट के नेटवर्क की परतें उजागर करने में जुटी है। इसके अलावा अन्य अस्पतालों में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट की संभावना की जांच भी की जा रही है।

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