घोर लापरवाही: कानपुर जू की झील में फिर सैकड़ों मछलियों की मौत,18 दिन में दूसरी घटना

✍️NNS Desk
घोर लापरवाही: कानपुर जू की झील में फिर सैकड़ों मछलियों की मौत,18 दिन में दूसरी घटना

कानपुर चिड़ियाघर की झील में एक बार फिर बड़ी संख्या में मछलियों की संदिग्ध मौत हो गई. सोमवार सुबह झील की सतह पर सैकड़ों मरी हुई मछलियां तैरती मिलीं. घटना के बाद जू प्रशासन ने नाव के जरिए मछलियों को बाहर निकलवाकर गड्ढा खोदकर दफना दिया. यह 18 दिनों के भीतर दूसरी ऐसी घटना है. इससे पहले 24 जुलाई को भी झील में हजारों मछलियां मर गई थीं, लेकिन अब तक उनकी मौत के कारणों की वैज्ञानिक जांच पूरी नहीं हो सकी है.

लगातार दूसरी घटना के बाद भी झील के पानी, प्रदूषण और अन्य संभावित कारणों की स्पष्ट जांच नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं. जू प्रशासन का कहना है कि अब पानी की वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी, जबकि नगर निगम से नाले की जांच का इंतजार किया जा रहा है.

दवा डालकर फिर की गई औपचारिक कार्रवाई

24 जुलाई की घटना के बाद झील में ऑक्सीजन बढ़ाने वाली दवा डाली गई थी. इस बार भी मछलियों की मौत के बाद करीब 60 किलो टॉक्सिन बाइंडर का घोल झील में डाला गया है. हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मछलियों की मौत किसी बीमारी, पानी में ऑक्सीजन की कमी या किसी जहरीले तत्व के कारण हुई है. वैज्ञानिक जांच के बिना वास्तविक वजह सामने नहीं आ सकी है.

जलकुंभी और घास से फिर घिरी झील: पिछली घटना के बाद विशेषज्ञों ने झील में फैली जलकुंभी और घास को मछलियों की मौत का प्रमुख कारण बताया था. उनका कहना था कि इससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है. जू प्रशासन ने सफाई अभियान शुरू तो कराया, लेकिन कुछ हिस्से की सफाई के बाद काम रोक दिया गया. अब झील का बड़ा हिस्सा फिर से जलकुंभी और घास से भर गया है, जिससे जलीय जीवों के लिए संकट की स्थिति बन गई है.

नाले के प्रदूषित पानी पर अब भी संशय: झील में गिरने वाले एक बड़े नाले से प्रदूषित पानी आने की आशंका भी लगातार जताई जा रही है. जू प्रशासन ने इसकी जांच के लिए नगर निगम को पत्र भेजा है, लेकिन अब तक कोई टीम मौके पर जांच करने नहीं पहुंची. ऐसे में यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कहीं नाले के जरिए कोई रासायनिक या प्रदूषित पानी तो झील में नहीं पहुंच रहा है.

रेंजर बोले- क्षमता से अधिक हैं मछलियां: चिड़ियाघर के रेंजर फिरोज खान ने बताया कि झील में मछलियों की संख्या उसकी क्षमता से अधिक हो गई है, जिससे ऐसी समस्या सामने आ रही है. उन्होंने कहा कि जलकुंभी और घास हटाने का काम दोबारा शुरू कराया जा रहा है और अब पानी की वैज्ञानिक जांच भी कराई जाएगी. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नाले की जांच के लिए नगर निगम को पत्र भेजा गया है, लेकिन अभी तक वहां से कोई जवाब नहीं मिला है.

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