DhirendraKrishnaShastri: बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक महीने रहेंगे एकांतवास में, बद्रीनाथ की पहाड़ियों में करेंगे तप-साधना

✍️Amisha Sachan
DhirendraKrishnaShastri: बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक महीने रहेंगे एकांतवास में, बद्रीनाथ की पहाड़ियों में करेंगे तप-साधना

DhirendraKrishnaShastri: बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने घोषणा की है कि वह एक महीने तक दुनिया के संपर्क से दूर रहेंगे। उन्होंने बताया कि गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए वह उत्तराखंड के पवित्र बद्रीनाथ धाम की पहाड़ियों में तप-साधना करने जा रहे हैं। इस दौरान वह पूरी तरह से एकांत में रहेंगे और मोबाइल, टीवी, कथा, प्रवचन या किसी भी तरह के इंटरव्यू से दूरी बनाए रखेंगे।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि यह समय उनके लिए आत्मचिंतन, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने का होगा। उन्होंने बताया कि यह निर्णय अचानक नहीं बल्कि गुरु की प्रेरणा और आदेश के बाद लिया गया है। उनके अनुसार संतों और साधकों के जीवन में समय-समय पर एकांतवास बहुत महत्वपूर्ण होता है, जिससे मन, विचार और आध्यात्मिक शक्ति को नई दिशा मिलती है।

— NATION NOW समाचार (@nnstvlive) March 7, 2026

उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ की पवित्र और शांत पहाड़ियां साधना के लिए सर्वोत्तम स्थानों में से एक मानी जाती हैं। वहां का वातावरण मन को स्थिर और एकाग्र करने में मदद करता है। इसी वजह से वह इस स्थान को साधना के लिए चुन रहे हैं। इस दौरान वह किसी भी प्रकार की सार्वजनिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे।

बाबा बागेश्वर ने यह भी बताया कि मई महीने में वह एकांतवास के लिए जाएंगे और लगभग एक महीने बाद वापस लौटेंगे। इस दौरान बागेश्वर धाम में नियमित धार्मिक गतिविधियां जारी रहेंगी, लेकिन स्वयं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं रहेंगे।

उन्होंने अपने अनुयायियों से अपील की कि वे इस अवधि में धैर्य रखें और अपनी श्रद्धा बनाए रखें। बाबा ने कहा कि साधना के इस समय के बाद वह नई ऊर्जा और नए विचारों के साथ वापस आएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि वापसी के बाद वह समाज और धर्म के लिए कुछ नया और बड़ा करने की योजना पर काम करेंगे।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के इस फैसले से उनके भक्तों में उत्सुकता बढ़ गई है। कई श्रद्धालु इसे एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक कदम मान रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि उनके एकांतवास के बाद बागेश्वर धाम से कोई नई पहल या आध्यात्मिक संदेश सामने आ सकता है।

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