CM Mohan Yadav Varanasi Visit: वाराणसी दौरे पर सीएम डॉ. मोहन यादव CM ने बाबा विश्वनाथ के किए दर्शन

✍️Amisha Sachan
CM Mohan Yadav Varanasi Visit: वाराणसी दौरे पर सीएम डॉ. मोहन यादव CM ने बाबा विश्वनाथ के किए दर्शन

वाराणसी – मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश सहयोग सम्मेलन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वाराणसी पहुंचे और बाबा विश्वनाथ की शरण में सिर झुकाकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा, “मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश मिलकर विकास की नई इबारत लिखेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में धार्मिक नगरियों में लोगों का जीवन बेहतर हो रहा है।”

काशी में अवलोकन और बैठक

सीएम डॉ. यादव ने काशी पहुंचकर क्राउड फ्लो डिज़ाइन, इंफ्रास्ट्रक्चर और तीर्थयात्री प्रबंधन प्रणाली का अवलोकन किया। उन्होंने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष प्रस्तुतियां देखीं।इसके अलावा उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में अधिकारियों के साथ बैठक की और मंदिर प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

धार्मिक पर्यटन और लघु उद्योगों पर जोर

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि ओडीओपी (One District One Product) योजना में उत्तर प्रदेश ने बहुत अच्छा काम किया है और इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम का बड़ा योगदान है। मध्यप्रदेश सरकार भी इस योजना में सक्रिय भूमिका निभा रही है और दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।उन्होंने कहा, “हम धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ लघु उद्योगों पर भी ध्यान देंगे। यह सुनिश्चित करेंगे कि युवाओं को रोजगार मिले, गरीबों की जिंदगी बेहतर हो और उत्पादों को सही मूल्य मिले। इससे राज्यों की समृद्धि और देश की प्रगति भी सुनिश्चित होगी।”

युवा रोजगार और विकास के उपाय

डॉ. यादव ने आगे कहा कि दोनों राज्यों के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, लघु उद्योगों के बीच समन्वय बनाने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए रोड शो और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और योगदान पर मध्यप्रदेश में रिसर्च चल रही है और सरकार इसके लिए फैलोशिप भी दे रही है। इससे ऐतिहासिक ज्ञान के साथ-साथ पर्यटन और शिक्षा क्षेत्र में भी नई पहल होगी।

दो राज्यों के सहयोग से नई इबारत

मुख्यमंत्री ने सम्मेलन के दौरान जोर दिया कि मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश का सहयोग न केवल धार्मिक नगरियों के विकास के लिए जरूरी है, बल्कि यह आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी दोनों राज्यों की प्रगति में योगदान देगा।दोनों राज्यों के अधिकारियों और उद्यमियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए विशेष कार्यशालाएं और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि लघु उद्योगों और स्थानीय उत्पादों को बेहतर पहचान मिले

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