बदायूं में स्वयं सहायता समूह में 2.65 लाख का घोटाला, पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप

✍️Amisha Sachan
बदायूं में स्वयं सहायता समूह में 2.65 लाख का घोटाला, पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप

सवांददाता अखिलेश कुमार मिश्रा बदायूं के बिसौली ब्लॉक से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बनाए गए स्वयं सहायता समूह (SHG) में 2 लाख 65 हजार रुपये के कथित घोटाले का खुलासा हुआ है। इस मामले ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को सकते में डाल दिया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि महिला सशक्तिकरण योजनाओं में भ्रष्टाचार कैसे पनप रहा है।

मामला कहाँ का है?

सूत्रों के अनुसार मामला बेहटा पाठक गांव का है। यहां स्वयं सहायता समूह में पदाधिकारी बने एक ही परिवार के दो लोगों पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि उन्होंने सचिव को जानकारी दिए बिना बैंक से लगभग 2 लाख 65 हजार रुपये निकाल लिए।

घोटाला कैसे सामने आया?

घोटाले का खुलासा तब हुआ जब बैंक ने लोन रिकवरी के लिए सचिव को फोन किया। इस बात के बाद समूह में हड़कंप मच गया और पता चला कि पैसे निकालने वालों के पक्ष में बौखलाहट देखने को मिली। वहीं, स्थानीय लोगों के अनुसार इस मामले में समूह से जुड़े एक कर्मचारी की भी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।

भ्रष्टाचार की और बातें

सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत चल रहे समूहों में भ्रष्टाचार की शिकायतें पहले भी सामने आई हैं। समूह सखियों की नियुक्ति में रिश्वतखोरी और अनियमितताएं अक्सर देखने को मिलती हैं। यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि योजनाओं का उद्देश्य भले महिला सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता हो, लेकिन भ्रष्टाचार इसे प्रभावित कर रहा है।

जिम्मेदारों पर सवाल

स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर महिलाओं को सशक्त बनाने वाली योजनाओं में यह भ्रष्टाचार कब तक चलता रहेगा। पदाधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी जोर पकड़ रही है। अब बड़ी चुनौती यह है कि क्या जांच के बाद दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होगी।स्वयं सहायता समूह के घोटाले का असर सिर्फ योजना की विश्वसनीयता पर नहीं, बल्कि वहां जुड़े सदस्यों और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है। जब योजनाओं में पारदर्शिता नहीं होती है, तो लाभार्थियों का भरोसा कमजोर पड़ जाता है और उनका आत्मनिर्भर बनने का सपना अधूरा रह जाता है।

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