अक्षय तृतीया 2026 की सही तारीख कन्फर्म, 19 नहीं, इस दिन करें पूजा और खरीदारी

✍️Amisha Sachan
अक्षय तृतीया 2026 की सही तारीख कन्फर्म, 19 नहीं, इस दिन करें पूजा और खरीदारी

अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का एक अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन बिना किसी विशेष मुहूर्त के भी हर शुभ कार्य करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान, जप, तप और खरीदारी का फल कभी समाप्त नहीं होता। यही वजह है कि इसे “अक्षय” यानी कभी न खत्म होने वाला पुण्य देने वाला दिन कहा जाता है।लेकिन साल 2026 में अक्षय तृतीया की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि यह पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाए या 20 अप्रैल को। आइए इस कन्फ्यूजन को पूरी तरह स्पष्ट करते हैं।

अक्षय तृतीया 2026 की सही तारीख

पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजकर 45 मिनट से होगी और यह 20 अप्रैल 2026 को सुबह 7 बजकर 49 मिनट तक रहेगी।हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का निर्धारण “उदया तिथि” के आधार पर किया जाता है। इसका मतलब है कि जिस दिन सूर्योदय के समय जो तिथि मौजूद रहती है, वही दिन उस पर्व के लिए मान्य होता है।इसी नियम के अनुसार, 20 अप्रैल की सुबह तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी। इसलिए धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष गणना के अनुसार अक्षय तृतीया 2026 का मुख्य पर्व 20 अप्रैल को मनाना ही अधिक शुभ माना जाएगा

अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त

अक्षय तृतीया की खास बात यह है कि इस दिन किसी भी समय शुभ कार्य किया जा सकता है। फिर भी पूजा और खरीदारी के लिए कुछ विशेष समय को अधिक लाभकारी माना जाता है।

  • पूजा का शुभ समय: सुबह सूर्योदय से लेकर तृतीया तिथि समाप्त होने तक
  • विशेष शुभ काल: प्रातः काल और अभिजीत मुहूर्त

इस दिन सोना-चांदी खरीदने, नया व्यापार शुरू करने या कोई बड़ा निर्णय लेने के लिए पूरा दिन ही शुभ माना जाता है।


🌼 अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व

“अक्षय” शब्द का अर्थ होता है—जो कभी खत्म न हो। इसी कारण इस दिन किए गए सभी शुभ कार्यों का फल अनंत माना जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुई थीं:भगवान भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म इसी दिन हुआ था।महाभारत काल में वेदव्यास ने भगवान गणेश के साथ मिलकर महाभारत की रचना प्रारंभ की थी।इन घटनाओं के कारण यह दिन ज्ञान, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक बन गया है।

पूजा विधि और नियम

अक्षय तृतीया के दिन पूजा-विधि का विशेष महत्व होता है। यदि आप इस दिन सही तरीके से पूजा करते हैं, तो आपको कई गुना अधिक फल प्राप्त हो सकता है।

पूजा करने की विधि:

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
  2. घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
  3. उन्हें पीले फूल, तुलसी पत्र और चंदन अर्पित करें।
  4. घी का दीपक जलाकर आरती करें।
  5. प्रसाद में फल और मिठाई चढ़ाएं।

इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है, इसलिए पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।


💰 खरीदारी और निवेश का महत्व

अक्षय तृतीया के दिन सोना-चांदी खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया निवेश घर में स्थायी समृद्धि और खुशहाली लाता है।आज के समय में लोग इस दिन केवल आभूषण ही नहीं, बल्कि प्रॉपर्टी, वाहन या नए बिजनेस की शुरुआत भी करते हैं।यह दिन नए काम की शुरुआत के लिए इतना शुभ माना जाता है कि किसी विशेष मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती।

दान का विशेष महत्व

अक्षय तृतीया पर दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। खासकर गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए जल से जुड़े दान का विशेष महत्व होता है। पानी से भरा घड़ा,अन्न और वस्त्र,छाता और चप्पल,गुड़ और सत्तू,इन चीजों का दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।

आध्यात्मिक दृष्टि से महत्व

अक्षय तृतीया केवल भौतिक लाभ का ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का भी दिन है। इस दिन ध्यान, जप और तप करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं और सच्चे मन से पूजा करते हैं, उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है।

क्यों है 20 अप्रैल ही सही दिन?

हालांकि तृतीया तिथि 19 अप्रैल को शुरू हो रही है, लेकिन वह दिन सूर्योदय के समय द्वितीया तिथि में आएगा। वहीं 20 अप्रैल को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि रहेगी।इसी कारण “उदया तिथि” के नियम के अनुसार 20 अप्रैल को ही अक्षय तृतीया मनाना शास्त्रसम्मत और अधिक शुभ माना जाएगा।

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