जाजमऊ में ‘ययाति’ का 2800 साल पुराना टीला दरका: दो मकानों का हिस्सा गंगा में समाया

कानपुर के जाजमऊ में गंगा किनारे स्थित 2800 साल पुराना ऐतिहासिक टीला एक बार फिर दरक गया. टीले का हिस्सा खिसकने से दो मकानों का कुछ हिस्सा गंगा में समा गया, जिससे घरों में रखा हजारों रुपये का सामान भी तेज धारा में बह गया. यह घटना शनिवार दोपहर करीब 3 बजे सामने आई.
स्थानीय निवासियों के अनुसार, टीले के ठीक किनारे बने मुख्तार के मकान के स्टोर का एक हिस्सा अचानक गंगा में गिर गया. इस स्टोर में किरायेदारों का घरेलू सामान रखा था. बताया गया है कि मुख्तार के मकान में लगभग पांच किरायेदार रहते हैं. इस हादसे में लल्ला और इलियास का सामान भी गंगा में बह गया. इसके अतिरिक्त, मुख्तार के मकान की पीछे की दीवार भी ढह गई है.

स्थानीय लोगों की मुख्य चिंता यह है कि यदि टीले का कटाव इसी तरह जारी रहा, तो और भी मकान इसकी चपेट में आ सकते हैं. निवासियों का कहना है कि बारिश के दौरान टीले का हिस्सा कई बार दरक चुका है और कई मकान पहले से ही खतरे की जद में हैं. इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं होने पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.
जाजमऊ का यह क्षेत्र केवल एक आवासीय इलाका नहीं है, बल्कि इसे कानपुर की प्राचीन ऐतिहासिक विरासत से भी जोड़ा जाता है. इसका उल्लेख राजा ययाति की राजधानी से संबंधित क्षेत्र के रूप में भी मिलता है. इस प्रकार, एक ओर जहां लोगों के घर और जान खतरे में हैं, वहीं दूसरी ओर कानपुर की प्राचीन पुरातात्विक विरासत पर भी संकट मंडरा रहा है.

प्रशासन की ओर से टीला खाली करवाने के लिए कई मकानों में नोटिस चस्पा किए गए थे. हालांकि, एचआरआई/सैटेलाइट आधारित वैज्ञानिक जांच अभी बाकी है. ऐसे में सवाल उठता है कि यह जांच कब पूरी होगी और तब तक टीले के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी.
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