आज भानू सप्तमी पर रविवार का शुभ संयोग, सूर्य देव को जल चढ़ाने से मिलेगा दोगुना फल

भानू सप्तमी का दिन सूर्य देव की उपासना करके उनकी कृपा पाने के लिए विशेष होता है. उस पर भानू सप्तमी का रविवार को पड़ना दोगुना फल देगा. आज सूर्य देव को जल चढ़ाएं, सूर्य मंत्रों का जाप करें, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें. साथ ही जरूरतमंदों को दान दें. साथ ही आज से पंचक प्रारंभ हो रहे हैं, लिहाजा अगले 5 दिन तक पंचक में वर्जित कार्य न करें.
सनातन धर्म में भानु सप्तमी पर्व का बहुत महत्व है. इस दिन को सूर्य उपासना के लिए अति उत्तम माना गया है. सूर्य देव को समर्पित इस पर्व को लेकर पौराणिक मान्यता है कि भानु सप्तमी पर ही अपने रथ पर सवार होकर सूर्य देव धरती पर अवतरित हुए. ज्येष्ठ अधिकमास में पड़ने वाली भानु सप्तमी का विशेष महत्व है. अधिकमास में भानु सप्तमी 07 जून को है. इस दिन सूर्य देव की साधना कर कुछ विशेष उपाय करें तो जीवन में सुख-शांति और धन की आवक बढ़ेगी. इसके अलावा आत्मविश्वास और लीडरशिप क्षमता बढ़ती है. ऐसे में कुछ विशेष उपायों को आइए जानें.
अधिकमास की भानु सप्तमी के उपाय
सूर्य देव को अर्घ्य दें: अधिकमास की भानु सप्तमी पर्व पर सुबह जल्दी उठे और स्नान आदि कर साफ कपड़े पहनें. अब सूर्योदय होते ही सूर्य देव को अर्घ्य दें. अर्घ्य देते समय अपनी मुख पूर्व दिशा में रखें. अर्घ्य के जल में कुमकुम, अक्षत और लाल फूल डाल दें. अर्घ्य देते हुए “ॐ सूर्याय नम:” मंत्र का जाप लगातार करते रहे. आपकी सच्ची श्रद्धा से सूर्य देव अति प्रसन्न होंगे और आत्मविश्वास बढ़ने का आशीर्वाद देंगे व मनोकामनाएं पूर्ण होगी.
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ: भानु सप्तमी के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना अति शुभ होगा. इससे जीवन में सकारात्मकता आएगी और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी. ऑफिस में टीम लीड बनना हो या किसी ग्रुप का लीडर बनना हो, इस स्तोत्र का पाठ कर कोई भी सफलता पा सकता है. बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकलने लगता है.
सूर्य देव की पूजा करें: भानु सप्तमी पर सूर्य देव की विधि-विधान से पूजा करें और व्रत का संकल्प करें. नमक का सेवन इस दिन न करें. व्रत के नियमों का पालन करने से सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है. ऐसे लोग जीवन में तेजी से तरक्की करते हैं और उनके मुख पर एक अलग ही तेज होता है.
भानू सप्तमी पर दान करें: सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए भानु सप्तमी पर विशेष दान आदि करें. सूर्य पूजा के बाद क्षमता अनुसार अन्न-धन या जरूरत के सामान का मंदिर या गरीब लोगों में दान कर सकते हैं. इस कार्य से समाज में सम्मान बढ़ने लगता है.
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