AhirRegiment : “120 बहादुर” से उठे राजनीतिक सवाल: अहीर रेजिमेंट और यूपी की बदलती सियासत

‘120 बहादुर’ ने बढ़ाई अहीर रेजिमेंट की मांग, यूपी की राजनीति में मचा हलचल

AhirRegiment : भारतीय सेना की बहादुरी पर आधारित फिल्म ‘120 बहादुर’ न सिर्फ देशभक्ति का संदेश दे रही है, बल्कि इसके साथ अहीर रेजिमेंट की लंबे समय से चल रही मांग को भी फिर एक बार चर्चा के केंद्र में ले आई है। फिल्म के रिलीज होने के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है, खासकर वहां जहाँ यादव समुदाय की बड़ी आबादी है।

image 372 1

अहीर रेजिमेंट की मांग ने पकड़ी रफ्तार

अहीर यानी यादव समुदाय का भारतीय सेना में योगदान इतिहास से दर्ज है, चाहे 1962 का रेजांग ला युद्ध हो या बाद के कई मोर्चे। लंबे समय से यादव समुदाय एक अलग “अहीर रेजिमेंट” की मांग करता रहा है।’120 बहादुर’ में दिखे साहस और शौर्य के दृश्यों ने इस मांग को नए सिरे से धार दी है।यूपी में बलिया, गोरखपुर, अयोध्या, जौनपुर, इटावा, मैनपुरी और कन्नौज जैसे जिलों में इस मुद्दे पर लगातार सभाएं, पोस्टर कैंपेन और सोशल मीडिया अभियान तेजी से बढ़े हैं।

सियासी दलों की सक्रियता बढ़ी

यूपी की राजनीति में यादव समुदाय का बड़ा प्रभाव रहा है। ऐसे में फिल्म के बाद अहीर रेजिमेंट की मांग पर सियासी दलों की नजरें टिक चुकी हैं।

  • सपा (समाजवादी पार्टी) इस मुद्दे को सक्रिय रूप से उठाती रही है और फिल्म के बाद इसे यादव वोटबैंक को जोड़ने का बड़ा अवसर मान रही है।
  • भाजपा भी इस पर बैलेंस बनाते हुए “सेना की नीति और संरचना राजनीतिक आधार पर नहीं बदलती” जैसे बयान दे रही है, लेकिन जमीन पर उसके स्थानीय नेता इस विषय पर बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं।
  • कांग्रेस और क्षेत्रीय दल भी इसे “सामाजिक प्रतिनिधित्व” के नजरिए से देख रहे हैं।

फिल्म से बदला माहौल, बढ़ रही बहस

‘120 बहादुर’ की सफलता के बाद सोशल मीडिया पर #AhirRegimentNow और #120Bahadur जैसे हैशटैग लगातार ट्रेंड कर रहे हैं।
वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी नई रेजिमेंट सेना की रणनीतिक आवश्यकता और ऐतिहासिक आधार पर बनती है, राजनीतिक मांगों पर नहीं।

लेकिन राजनीतिक रूप से देखा जाए तो यह मुद्दा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में बड़ा मोड़ बन सकता है।

अहीर समुदाय का साफ संदेश

अहीर युवाओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह मांग सिर्फ पहचान का सवाल नहीं, बल्कि सेना में योगदान के सम्मान की बात है।
वे मानते हैं कि ‘120 बहादुर’ ने देशभर के युवाओं के मन में “अहीरों की ऐतिहासिक बहादुरी” का भाव फिर से जगा दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *