Uterus fibroid causes: बच्चेदानी में फाइब्रॉइड (गांठ) – कारण, लक्षण और इलाज पूरी जानकारी

✍️Amisha Sachan
Uterus fibroid causes: बच्चेदानी में फाइब्रॉइड (गांठ) – कारण, लक्षण और इलाज पूरी जानकारी

Uterus fibroid causes: फाइब्रॉइड (Fibroid) या गर्भाशय की गांठ महिलाओं में आम लेकिन जटिल समस्या है। ये गर्भाशय की मांसपेशियों और फाइब्रस ऊतकों से बनी गांठें होती हैं। अक्सर ये सौम्य (benign) होती हैं, यानी कैंसर नहीं होती। इन्हें लेयोमायोमा या मायोमा भी कहा जाता है।फाइब्रॉइड का आकार छोटा से लेकर बड़ा हो सकता है और संख्या भी अलग-अलग हो सकती है। कई बार यह कोई लक्षण नहीं देती, लेकिन कुछ महिलाओं में भारी मासिक धर्म, पेट में दर्द, पेशाब में दिक्कत, या बांझपन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यह स्थिति 30–50 वर्ष की उम्र की महिलाओं में अधिक देखी जाती है।

फाइब्रॉइड के प्रकार

  1. इंट्राम्युरल फाइब्रॉइड: गर्भाशय की मांसपेशियों के भीतर बनते हैं।
  2. सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड: गर्भाशय की अंदरूनी परत में बनते हैं और मासिक धर्म को प्रभावित कर सकते हैं।
  3. सबसीरोसल फाइब्रॉइड: गर्भाशय की बाहरी सतह पर बनते हैं और पेट में दबाव या सूजन पैदा कर सकते हैं।
  4. पेडंक्युलेटेड फाइब्रॉइड: डंठल के सहारे गर्भाशय से जुड़े होते हैं और घूम सकते हैं।

बच्चेदानी में गांठ क्यों होती है?

फाइब्रॉइड के कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन कुछ प्रमुख कारण हैं:

  • हार्मोनल असंतुलन: एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन की अधिकता
  • आनुवंशिक कारण: परिवार में फाइब्रॉइड का इतिहास
  • मोटापा (Obesity): अधिक वजन वाली महिलाओं में जोखिम बढ़ता है
  • अनियमित जीवनशैली: तनाव, नींद की कमी, असंतुलित आहार

फाइब्रॉइड के लक्षण

  • मासिक धर्म के दौरान या बीच में अत्यधिक रक्तस्राव
  • पेट या पीठ में दर्द
  • बार-बार पेशाब आना
  • यौन संबंध बनाते समय दर्द
  • पेट में दबाव या भारीपन
  • कमजोरी, एनीमिया, कब्ज, पैर में दर्द

यदि फाइब्रॉइड बड़ा हो चुका है, तो डॉक्टर दवाइयां, हिस्टेरोस्कोपी, लेप्रोस्कोपी या अन्य सर्जरी से इलाज करते हैं।

प्रेग्नेंसी और फाइब्रॉइड

छोटे फाइब्रॉइड भी गर्भावस्था के दौरान बढ़ सकते हैं। शुरुआती महीनों में यह तेजी से बढ़ सकते हैं और दर्द या ब्लीडिंग कर सकते हैं। अल्ट्रासाउंड के जरिए डॉक्टर भ्रूण और फाइब्रॉइड के विकास की निगरानी करते हैं।यदि फाइब्रॉइड सर्विक्स या लोअर साइड में हो तो यह बर्थ कैनाल को ब्लॉक कर सकता है, जिससे सी-सेक्शन की आवश्यकता पड़ सकती है। आईवीएफ की मदद से भी फाइब्रॉइड के बावजूद गर्भधारण संभव है।

फाइब्रॉइड का इलाज

1. दवा आधारित इलाज

  • दर्द निवारक दवाएं
  • गर्भनिरोधक गोलियां
  • प्रोजेस्टिन-रिलीज़िंग IUD
  • GnRH एगोनिस्ट
  • एंटी-हार्मोनल एजेंट

2. आयुर्वेदिक इलाज

  • कांचनार गुग्गुलु, अशोक चूर्ण, त्रिफला, अलसी
  • पंचकर्म जैसे बस्ती, उत्तर बस्ती
  • आहार सुधार, योग, तनाव प्रबंधन

नोट: आयुर्वेदिक दवाएं अस्थाई राहत देती हैं; लक्षण लौट सकते हैं।

3. सर्जरी

  • एब्डोमिनल हिस्टेरेक्टॉमी: पेट में कट लगाकर गर्भाशय निकालना
  • वजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी: योनी के रास्ते गर्भाशय निकालना
  • लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी: कम जोखिम और जल्दी रिकवरी
  • मायोमेक्टोमी: फाइब्रॉइड हटाना, गर्भधारण की संभावना बनी रहती है
  • हिस्टेरोस्कोपिक रिसेक्शन: पतली दूरबीन के जरिए फाइब्रॉइड हटाना

लागत और रिकवरी

भारत में सर्जरी की लागत ₹40,000 से ₹1,50,000 तक हो सकती है। सरकारी अस्पताल में यह सस्ती हो सकती है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी महंगी लेकिन तेज़ रिकवरी वाली होती है।

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