संसद में गूंजा समोसे का मुद्दा! रवि किशन बोले – कहीं बड़ा, कहीं छोटा, रेट क्यों अलग?

नई दिल्ली – संसद का मानसून सत्र अपने चरम पर है और गंभीर बहसों के बीच बीजेपी सांसद और फिल्म अभिनेता रवि किशन ने एक बेहद चटपटा मुद्दा उठाया – समोसा! जी हां, रवि किशन ने सदन में सवाल उठाया कि आखिर संसद की कैंटीन में मिलने वाले समोसे का आकार और दाम एक समान क्यों नहीं हैं? उनका कहना था कि कहीं समोसा छोटा है, कहीं बड़ा और दाम भी अलग-अलग लिए जा रहे हैं।
रवि किशन ने क्या कहा? संसद में गूंजा समोसे का मुद्दा
रवि किशन ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा:”हमारे यहां संसद की कैंटीन में समोसे के रेट अलग-अलग हैं। एक छोटा समोसा कहीं 12 रुपये का है, कहीं बड़ा समोसा 10 रुपये का पड़ता है… तो क्या समोसे के भी GST स्लैब हैं?“इस पर संसद में हंसी की लहर दौड़ गई, लेकिन उन्होंने गंभीर लहजे में सिस्टम में पारदर्शिता और एकरूपता की मांग की।
मामला सिर्फ समोसे तक सीमित नहीं…संसद में गूंजा समोसे का मुद्दा
रवि किशन ने दरअसल एक बड़ी बात को छोटे मुद्दे के जरिए उठाया। उनका इशारा था कि सरकारी व्यवस्थाओं में भोजन, रेट और सुविधा को लेकर समानता होनी चाहिए, चाहे वह कैंटीन हो या सरकारी तंत्र।
सोशल मीडिया पर चर्चा तेज संसद में गूंजा समोसे का मुद्दा
रवि किशन के इस बयान के बाद ट्विटर (X), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर #SamosaInParliament ट्रेंड करने लगा।
यूजर्स ने मजेदार मीम्स बनाए और कुछ ने यह भी कहा –”कम से कम अब समोसे की भी संसद में आवाज़ उठ गई!“
भले ही ये मुद्दा मजाकिया लगे, लेकिन रवि किशन का यह सवाल सार्वजनिक सुविधाओं में पारदर्शिता और समानता की तरफ ध्यान दिलाने वाला है। जनता से जुड़े हर छोटे-बड़े विषय की चर्चा संसद में होनी भी चाहिए, फिर चाहे वो समोसा ही क्यों न हो।
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