कानपुर देहात के जिला मुख्यालय से मात्र कुछ दूर बारा जोड़ के पास नेशनल हाईवे से कुछ ही दूरी पर स्थित खेतों में किसानों द्वारा खुलेआम पराली जलाई जा रही है। दिन के उजाले में उठता घना धुआं न केवल वायु गुणवत्ता को खराब कर रहा है, बल्कि यह साफ दिखाता है कि जिम्मेदार विभागों की निगरानी में भारी लापरवाही बरती जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेश फिर अनदेखे
पराली जलाने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय पहले ही सख्त निर्देश दे चुका है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था किपराली जलाने से देश में प्रदूषण बढ़ रहा है,लोगों की जीवन-अवधि कम हो रही है,और सरकारें इस पर रोक लगाने में असफल दिख रही हैं।कोर्ट ने राज्यों के मुख्य सचिवों, जिला अधिकारियों, तहसीलदारों और स्थानीय पुलिस प्रशासन को आदेश दिया था कि उनके क्षेत्र में एक भी जगह पर पराली न जले, इसके लिए कड़ी निगरानी और तुरंत कार्रवाई अनिवार्य है।

मैदान पर हालात बदतर
इसके बावजूद किसान दिन या रात का फायदा उठाकर खेतों में पराली जला रहे हैं।इससे न सिर्फ वायु प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि हाईवे के आसपास धुआं फैलने से सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है।सबसे बड़ी चिंता यह है कि पराली जलाने से निकलने वाले कणीय पदार्थ (PM 2.5) आम जनता के फेफड़ों, हृदय और आंखों पर गंभीर असर डालते हैं।
प्रशासन की लापरवाही उजागर
अधिकारियों की कठोरता के अभाव के कारण यह अवैध गतिविधि लगातार जारी है।जब इस संबंध में सदर तहसील अकबरपुर की एसडीएम नीलमा यादव से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने जांच कर उचित कार्रवाई करने की बात कही।
