Parliament Winter Session 2025: नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है, और इस बार सत्र हंगामेदार होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। विपक्ष की सक्रियता और सरकार के सामने विभिन्न संवेदनशील मुद्दों को देखते हुए शीतकालीन सत्र में सियासी बहसें तेज होने की उम्मीद है।

सत्र के प्रमुख मुद्दे
इस सत्र में मुख्य चर्चा का विषय SIR (Special Investment Region) विवाद, वंदे मातरम् के गाने को लेकर उठे मुद्दे और अन्य संवेदनशील राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दे होंगे। सरकार ने पहले ही रणनीति बनाकर विपक्ष के तेवर को देखते हुए अपनी कार्यवाही को सुचारू बनाने की योजना बनाई है।
सरकार की तैयारी
सरकार ने विभिन्न कमेटियों और संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिए हैं कि वे हर संभव स्थिति के लिए तैयार रहें। शीतकालीन सत्र में विपक्ष द्वारा विपक्षी आंदोलनों और भाषणबाजी की संभावना को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने अपने सदस्यों को मॉनिटरिंग और जवाबी रणनीति पर प्रशिक्षित किया है।
विपक्ष की सक्रियता
विशेषज्ञों का कहना है कि विपक्ष SIR से लेकर वंदे मातरम् तक विभिन्न मुद्दों पर जोर देकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। इसके अलावा, किसान और श्रमिक हितों, बेरोजगारी और स्थानीय मुद्दों पर भी हंगामा होने की संभावना है।
सत्र की अहमियत
शीतकालीन सत्र का उद्देश्य न केवल मौजूदा सरकारी नीतियों पर चर्चा करना है, बल्कि संसद के माध्यम से देश की संवैधानिक कार्यवाही और लोकतांत्रिक बहस को मजबूती देना भी है। सत्र के दौरान हर राजनीतिक दल अपनी रणनीति के अनुसार मुद्दों को उठाएगा और संसद की कार्यवाही को प्रभावित करेगा।सत्र के पहले दिन से ही राजनीतिक हलचल और बहसें संसद को हंगामेदार बना सकती हैं। ऐसे में सभी दलों की रणनीति, सांसदों की भागीदारी और बहस की दिशा इस सत्र की सफलता या विवादास्पद होने का पैमाना तय करेगी।
