नई दिल्ली। भारतीय सेना को अपनी नई कॉम्बैट कोट डिज़ाइन पर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट (IPR) मिल गया है। यह अधिकार मिलने के बाद सेना को इस विशेष कोट के निर्माण, उपयोग, उत्पादन और वितरण पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त हो गया है। यह देश की रक्षा तैयारियों और स्वदेशी सैन्य तकनीक को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सेना को मिले विशेष अधिकार
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, IPR मिलने के बाद कोई भी कंपनी, संस्था या व्यक्ति सेना की अनुमति के बिना इस कॉम्बैट कोट की नकल, बिक्री या उत्पादन नहीं कर पाएगा। यदि कोई ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
यह कदम न केवल सैन्य उपकरणों की गोपनीयता को सुरक्षित करेगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणित उत्पादन को भी बढ़ावा देगा।

क्यों खास है यह नया कॉम्बैट कोट?
सूत्रों के अनुसार, नया कॉम्बैट कोट आधुनिक युद्ध परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह अधिक टिकाऊ, हल्का और मौसम के अनुरूप एडेप्ट होने वाली तकनीक पर आधारित है। इसके अलावा, इसमें सैनिकों की सुरक्षा और गतिशीलता को सहज बनाने के लिए कई उन्नत फीचर्स जोड़े गए हैं।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम
सेना को IPR मिलने को रक्षा विशेषज्ञ देश में आत्मनिर्भरता और इंडिजिनस मिलिट्री टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने वाला बड़ा कदम मान रहे हैं। यह सुनिश्चित करेगा कि महत्वपूर्ण सैन्य डिजाइन विदेशी या निजी हाथों में न जाएं और संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रहे।
