इटावा :हाईटेंशन लाइन हादसा, गरीब अशुतोष का जीवन बदल गया, सिस्टम पर उठ रहे सवाल

इटावा के ग्राम नेबरपुर से एक दर्दनाक खबर सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 21 मार्च 2026 को सटरिंग का काम कर रहे अशुतोष अचानक 11,000 वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए। हादसा इतना भयानक था कि डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए उनका एक पैर काटना पड़ा।सोचिए, एक गरीब परिवार का जवान बेटा, जो घर का सहारा था, आज जिंदगीभर के लिए अपंग हो गया। यह हादसा सिर्फ व्यक्तिगत दुख का मामला नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे विद्युत विभाग की लापरवाही की कहानी भी कहता है।

हाईटेंशन लाइनों की सुरक्षा पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह खतरा पहले से मौजूद था। लटकती और खुले हाईटेंशन लाइनें कई महीनों से जगह-जगह देखी जा सकती थीं। सवाल उठता है कि इस स्थिति के बावजूद सुरक्षा के क्या उपाय किए गए? आखिरकार, जिम्मेदारी किसकी थी इन जानलेवा तारों को सुरक्षित करने की?विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली विभाग को समय पर निरीक्षण करना और खतरनाक लाइनों को सुरक्षित करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। लेकिन अशुतोष का हादसा इस बात को दर्शाता है कि विभाग ने जरूरी कदम नहीं उठाए।
प्रशासन और इलाज की भूमिका
हादसे के तुरंत बाद अशुतोष को अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी जान बचाई, लेकिन पैर कटना पड़ा। यह सोचने वाली बात है कि क्या समय पर उचित इलाज और प्रशासनिक मदद मिलती, तो क्या उनकी अंगभंगता बच सकती थी?इस हादसे पर महानवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं विधानसभा प्रत्याशी हरीश लोधी ने पीड़ित परिवार से मिलकर कहा,“यह सिर्फ हादसा नहीं, सिस्टम की लापरवाही है। हम पीड़ित परिवार को न्याय और मुआवजा दिलाकर रहेंगे।”चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता इस दर्दनाक स्थिति में नदारद हैं। जनता का सवाल है कि वोट मांगने वाले लोग इस पीड़ा में क्यों दिखाई नहीं दे रहे।
जनता का गुस्सा और भविष्य की चिंता
पूरा क्षेत्र अब जवाब मांग रहा है। क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी? क्या पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा मिलेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?अशुतोष की कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन सभी गरीब परिवारों की भी आवाज है जो सिस्टम की लापरवाही का शिकार होते हैं। यदि आज आवाज नहीं उठाई गई, तो कल कोई और अशुतोष इसी लापरवाही का शिकार हो सकता है।
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