देश में 2017 से अब तक 622 सफाई कर्मियों की मौत, 52 परिवार अब भी मुआवजे से वंचित

देश में सफाई कर्मियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। लोकसभा में सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुए हादसों में कुल 622 सफाई कर्मियों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह बताता है कि आज भी इस क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।

इन आंकड़ों के साथ एक और गंभीर तथ्य सामने आया है कि इन मृतकों के परिवारों को मिलने वाले मुआवजे में भी असमानता बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, 52 परिवार ऐसे हैं जिन्हें अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, 539 परिवारों को पूरा मुआवजा दिया जा चुका है और 25 परिवारों को आंशिक मुआवजा मिला है। यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था और राहत वितरण प्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है।
सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाले हादसे अक्सर जहरीली गैसों के कारण होते हैं। कई बार सफाई कर्मियों को बिना उचित सुरक्षा उपकरणों के ही इन खतरनाक स्थानों में उतरना पड़ता है। इससे उनकी जान पर सीधा खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आधुनिक तकनीक और मशीनों का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
साल 2025 के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हैं। इस वर्ष 842 सफाई कर्मियों ने विभिन्न प्रकार की शिकायतें दर्ज कराई हैं। इनमें जाति के आधार पर भेदभाव, खराब गुणवत्ता वाले सुरक्षा उपकरण और समय पर मजदूरी न मिलने जैसी समस्याएं शामिल हैं। यह दर्शाता है कि सफाई कर्मियों को न केवल शारीरिक खतरे का सामना करना पड़ता है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां भी झेलनी पड़ती हैं।
सफाई कर्मियों की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय रही है। सरकार ने समय-समय पर कई योजनाएं और नियम लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य इस पेशे को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाना है। हालांकि, जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का प्रभाव अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिख रहा है।
विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सबसे पहले मैन्युअल स्कैवेंजिंग जैसी प्रथाओं को पूरी तरह खत्म करने की आवश्यकता है। इसके लिए आधुनिक मशीनों का उपयोग, प्रशिक्षण और सख्त निगरानी जरूरी है। इसके अलावा, सफाई कर्मियों को बेहतर सुरक्षा उपकरण, बीमा और समय पर उचित वेतन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
मुआवजे के मामले में भी पारदर्शिता और तेजी लाने की जरूरत है। जिन परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें जल्द से जल्द आर्थिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए। यह न केवल उनके अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि सरकार की जवाबदेही को भी मजबूत करेगा।
इस पूरे मुद्दे पर सामाजिक जागरूकता भी बेहद जरूरी है। समाज के हर वर्ग को यह समझना होगा कि सफाई कर्मी हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।कुल मिलाकर, लोकसभा में प्रस्तुत यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों की पीड़ा का प्रतीक है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। यह समय है कि सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके और सफाई कर्मियों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके।
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