संसद में बड़ा सियासी संग्राम: महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पेश, वोटिंग में NDA को झटका

नई दिल्ली में गुरुवार, 16 अप्रैल 2026 को संसद का विशेष सत्र शुरू होते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया। इस सत्र में सबसे अहम मुद्दा नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़ा विधेयक रहा, जिसे सरकार की ओर से लोकसभा में पेश किया गया। इसके साथ ही परिसीमन से संबंधित विधेयक भी सदन में लाया गया, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और राजनीतिक लामबंदी देखने को मिली।

लोकसभा में तीन विधेयक पेश
सरकार की ओर से कुल मिलाकर तीन महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में पेश किए गए। इनमें महिला आरक्षण संशोधन विधेयक, परिसीमन आयोग से जुड़ा प्रस्ताव और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्व आधारित बनाना है।
वोटिंग में सरकार को मिली चुनौती
महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को पेश करने से पहले सदन में वोटिंग कराई गई, जिसमें समर्थन में 251 और विरोध में 185 वोट पड़े। हालांकि NDA के पास लोकसभा में 293 सदस्य होने के बावजूद केवल 251 सदस्यों ने ही वोटिंग में हिस्सा लिया, जबकि 42 सदस्य अनुपस्थित रहे।इस आंकड़े ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है कि सत्तारूढ़ गठबंधन को फिलहाल पूर्ण एकजुटता का सामना करना पड़ रहा है या नहीं। विपक्ष ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए और विधेयक के कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई।
विपक्ष और सत्ता पक्ष में टकराव
विपक्षी दलों ने सरकार द्वारा लाए जा रहे विधेयकों को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका आरोप है कि इन बदलावों के पीछे राजनीतिक उद्देश्य छिपा है। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि यह ऐतिहासिक कदम है, जो महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए जरूरी है।सदन में बहस के दौरान माहौल कई बार तनावपूर्ण भी हुआ, जिसके बाद विधेयक को पेश करने के लिए औपचारिक मतदान की प्रक्रिया अपनाई गई।
भाजपा का पलटवार
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिला आरक्षण कानून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा वर्षों से लंबित था, लेकिन पिछली सरकारों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने वर्षों तक केवल वादे किए, लेकिन उन्हें जमीन पर लागू नहीं किया। ठाकुर ने यह भी कहा कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है और महिलाओं के अधिकारों को लेकर बाधा उत्पन्न करने की कोशिश कर रहा है।
महिला सशक्तीकरण पर जोर
सरकार का कहना है कि यह विधेयक महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव है। साथ ही सदन की सदस्य संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने की भी योजना है, ताकि प्रतिनिधित्व को और व्यापक बनाया जा सके।
परिसीमन और भविष्य की राजनीति
परिसीमन आयोग के गठन से जुड़ा विधेयक भी सरकार के एजेंडे में शामिल है, जिससे देश में संसदीय और विधानसभा सीटों के पुनर्वितरण की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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