Parliament amendment 2026: केंद्र सरकार महिला आरक्षण संशोधन पर तैयारी, संसद और विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित

✍️Amisha Sachan
Parliament amendment 2026: केंद्र सरकार महिला आरक्षण संशोधन पर तैयारी, संसद और विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित

Parliament amendment 2026: केंद्र सरकार महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाने जा रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने के लिए सरकार ने कानूनों में संशोधन की तैयारी पूरी कर ली है। यह तैयारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की विभिन्न दलों के सांसदों के साथ बैठकों के बाद सामने आई है। सरकार इस सत्र में ही विधेयक पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम 19 सितंबर 2023 को पारित किया गया था। इस समय यह अधिनियम यह प्रावधान करती है कि महिला आरक्षण जनगणना के बाद परिसीमन और 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू होगा। लेकिन नई जनगणना और उसके आंकड़े आने में समय लगने के कारण सरकार ने 2011 की जनगणना के आधार पर नया परिसीमन करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य 2029 में महिला आरक्षण को समय पर लागू करना है।

वर्तमान योजना के अनुसार, लोकसभा में सदस्यों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी। इन सीटों में से 273 सीटें महिला सांसदों के लिए आरक्षित की जाएंगी। राज्यों की विधानसभाओं में भी सीटों का परिसीमन बदल जाएगा ताकि महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

हालांकि, इस योजना को लागू करने के लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता है। संविधान संशोधन पारित करने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है, जो वर्तमान में सरकार के पास अकेले नहीं है। इसलिए सरकार विपक्षी दलों और अन्य राजनीतिक समूहों के साथ आम सहमति बनाने का प्रयास कर रही है।सरकार का लक्ष्य है कि बजट सत्र में ही यह विधेयक पारित हो जाए। सरकार की कोशिश है कि सभी दल इसके पक्ष में आएं क्योंकि किसी भी दल के विरोध में आने की स्थिति राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिला आरक्षण का यह कदम भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। लंबे समय से महिलाओं का प्रतिनिधित्व संसद और विधानसभाओं में कम रहा है, और यह कदम उनकी स्थिति मजबूत करने में मदद करेगा।इस संशोधन से न केवल संसद में बल्कि राज्य विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित होंगे। सरकार का कहना है कि यह आरक्षण किसी भी राजनीतिक दल के लिए बाधा नहीं बल्कि लोकतंत्र में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाला कदम है।

केंद्र सरकार की इस पहल को सामाजिक और राजनीतिक दोनों दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। यदि आम सहमति से यह विधेयक पारित होता है, तो यह भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ऐतिहासिक कदम होगा।सरकार का ध्यान केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया को भी समय पर पूरा करने पर है। इससे 2029 के चुनाव में महिला प्रतिनिधित्व पहले से अधिक प्रभावी और स्थायी होगा।

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