Kishtwar Encounter : ऑपरेशन त्राशी-I में जैश के 3 कमांडर ढेर, चटरू जंगल में सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता

✍️Amisha Sachan
Kishtwar Encounter : ऑपरेशन त्राशी-I में जैश के 3 कमांडर ढेर, चटरू जंगल में सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता

किश्तवाड़ (जम्मू-कश्मीर): जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चटरू जंगल इलाके में चल रहे बड़े एंटी-टेरर ऑपरेशन के तहत सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammed (JeM) के तीन बड़े कमांडरों को मुठभेड़ में मार गिराया है। यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन त्राशी-I’ के तहत की गई, जिसे सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया।

क्या है ऑपरेशन त्राशी-I?

यह संयुक्त ऑपरेशन भारतीय सेना की White Knight Corps, Jammu and Kashmir Police और Central Reserve Police Force (CRPF) द्वारा चलाया गया।चिनाब घाटी में कई महीनों से सक्रिय एक विदेशी टेरर मॉड्यूल को ट्रैक करने के बाद यह ऑपरेशन शुरू किया गया था।व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि विश्वसनीय इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर किश्तवाड़ के बर्फ से ढके, दुर्गम चटरू जंगल क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादियों को ट्रैक और न्यूट्रलाइज करना था।

चटरू जंगल में मुठभेड़ कैसे हुई?

  • पिछले 15 दिनों से बर्फीले और ऊंचाई वाले इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी था।ड्रोन सर्विलांस के जरिए आतंकियों की लोकेशन का सटीक पता लगाया गया।आज सुबह सुरक्षा बलों का आतंकवादियों से संपर्क हुआ।मुठभेड़ के दौरान 2-3 आतंकवादियों की मौजूदगी की पुष्टि हुई।भीषण गोलीबारी में तीन बड़े कमांडर ढेर कर दिए गए।

सैफुल्लाह बलूच के मॉड्यूल का खात्मा

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मारे गए आतंकियों में कुख्यात कमांडर Saifullah Baloch के नेतृत्व वाला मॉड्यूल शामिल था। यह मॉड्यूल चिनाब घाटी में सक्रिय था और कई आतंकी गतिविधियों की योजना बना रहा था।

ड्रोन और माउंटेन वॉरफेयर का तालमेल

इस ऑपरेशन को ‘टैक्टिकल मास्टरक्लास’ बताया जा रहा है, जिसमें एडवांस्ड ड्रोन सर्विलांस और सटीक माउंटेन वॉरफेयर तकनीक का संयोजन किया गया। बर्फ से ढके ऊबड़-खाबड़ इलाके में ऑपरेशन चलाना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती था।इस सफल कार्रवाई से चिनाब घाटी में सक्रिय विदेशी टेरर नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस मॉड्यूल के खत्म होने से क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों में कमी आएगी।

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