Muzaffarpur marriage news: 28 साल की टीचर ने 60 साल के शख्स से की शादी, मां बनते ही बढ़ा विवाद

✍️Amisha Sachan
Muzaffarpur marriage news : 28 साल की टीचर ने 60 साल के शख्स से की शादी, मां बनते ही बढ़ा विवाद

Muzaffarpur marriage news: बिहार के मुजफ्फरपुर से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है। कहा जाता है कि प्यार न उम्र देखता है और न हालात—और यह कहानी उसी कहावत को सच साबित करती है।मुजफ्फरपुर जिले के Muzaffarpur के Aurai थाना क्षेत्र के मकसूदपुर गांव में 60 वर्षीय शख्स ने 28 साल की शिक्षिका शाइस्ता परवीन से विवाह कर लिया। उम्र के 32 साल के बड़े अंतर के बावजूद दोनों ने समाज की परवाह किए बिना साथ जीने-मरने का फैसला किया।परिवार और समाज के विरोध की आशंका को देखते हुए दोनों ने भारत-नेपाल सीमा पार कर नेपाल में विवाह किया। बताया जाता है कि वहां कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों पति-पत्नी के रूप में रहने लगे।शादी के कुछ समय बाद शाइस्ता परवीन ने एक पुत्री को जन्म दिया। बेटी के जन्म के साथ ही यह मामला गांव और आसपास के इलाकों में चर्चा का विषय बन गया।

शिक्षिका और वरिष्ठ प्रेमी की कहानी

स्थानीय लोगों के अनुसार, शाइस्ता परवीन एक निजी स्कूल में पढ़ाती थीं। वहीं, 60 वर्षीय व्यक्ति पहले से विवाहित थे या नहीं—इसको लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हालांकि इस बारे में आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।ग्रामीणों का कहना है कि दोनों के बीच लंबे समय से जान-पहचान थी, जो धीरे-धीरे प्रेम में बदल गई। उम्र के फासले के बावजूद दोनों ने सामाजिक बंधनों को चुनौती देते हुए साथ रहने का निर्णय लिया।

मां बनते ही फंसा पेच

बेटी के जन्म के बाद मामला और उलझ गया। चर्चा है कि संपत्ति, पहली पत्नी (यदि विवाह पूर्व से संबंध था) और पारिवारिक अधिकारों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि पुलिस या प्रशासन की ओर से किसी कानूनी विवाद की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।गांव में इस शादी को लेकर दो तरह की राय देखने को मिल रही है—कुछ लोग इसे व्यक्तिगत फैसला मान रहे हैं, तो कुछ इसे सामाजिक मान्यताओं के खिलाफ बता रहे हैं।

समाज बनाम निजी फैसला

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कानून में बालिग महिला और पुरुष को अपनी मर्जी से विवाह करने का अधिकार है, बशर्ते विवाह कानूनी रूप से वैध हो। उम्र का बड़ा अंतर सामाजिक बहस का मुद्दा जरूर बन सकता है, लेकिन कानून की नजर में सहमति सबसे अहम होती है।यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या समाज को दो बालिग व्यक्तियों के निजी फैसले में दखल देना चाहिए?

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