चढ़ावा चोरी की रिपोर्ट योगी को देने पहुंची SIT, 7 पेन ड्राइव में सबूत; ये लोग अयोध्या ना छोड़ें

✍️NNS Desk
चढ़ावा चोरी की रिपोर्ट योगी को देने पहुंची SIT, 7 पेन ड्राइव में सबूत; ये लोग अयोध्या ना छोड़ें

यूपी के अयोध्या में राम मंदिर के दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित हेराफेरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए. ये निर्देश एसआईटी ने लखनऊ रवाना होने से पहले दिए हैं. सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ सहित रोजाना की जांच रिपोर्ट डिजिटल रूप में सुरक्षित की जा रही हैं. रिपोर्ट को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने से पहले अंतिम रूप दिया जाएगा. एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है.

सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी सामने आई है. ट्रस्ट के पदाधिकारी सोने, चांदी और अन्य आभूषणों तथा कीमती पत्थरों से संबंधित रिकॉर्ड पर एसआईटी को संतोषजनक जवाब नहीं दे सके. सबसे बड़ी कथित अनियमितता कुंभ मेले के दौरान सामने आई, जब करीब दो महीने की अवधि में रोजाना लगभग 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे और दान पेटियां दो घंटे के भीतर ही नोटों से भर जाती थीं. एसआईटी की जांच केवल धन के कथित दुरुपयोग तक सीमित नहीं है बल्कि जांच में ट्रस्ट द्वारा अलग-अलग चरणों में की गई जमीन की खरीद और मंदिर के लिए निर्माण सामग्री की खरीद को भी शामिल किया गया है. ट्रस्ट ने बाजार भाव से लगभग 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर करीब 71 एकड़ जमीन खरीदी है.

गोविंद देव गिरि से भी पूछताछ होगी, जांच का दायरा बढ़ेगा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से राम मंदिर से संबंधित विषय के प्रमाण एसआईटी को सौंपने के सार्वजनिक ऐलान के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है. अब ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि से भी पूछताछ होनी है. साथ ही जांच की जद में सामानों की आपूर्ति और ट्रस्ट की धनराशि से अलग-अलग स्थानों पर कराए गए निर्माण के अलावा जमीनों की खरीद-फरोख्त का विषय भी शामिल कर लिया गया है. आपूर्तिकर्ताओं और ठेकेदारों को भी तलब कर उनसे अभिलेख मांगे गए हैं.

बयानों के पीछे नई भूमिका की चर्चा, कयास तेज: नृपेंद्र मिश्र के लगातार आ रहे बयानों ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. एक ओर उनके बयानों को सख्त कार्रवाई के संकेत माने जा रहे हैं, दूसरी ओर कुछ लोग इसके पीछे उनकी संभावित नई भूमिका की संभावना भी तलाश रहे हैं. जानकारों का कहना है कि राम मंदिर निर्माण का प्रमुख चरण लगभग पूरा हो चुका है. भवन निर्माण समिति की भूमिका भी सीमित होती जा रही है। ऐसे में नृपेंद्र मिश्र द्वारा हाल के दिनों में मंदिर प्रशासन में एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने की वकालत को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है.

सूत्रों के अनुसार अयोध्या में चर्चा है कि मंदिर निर्माण कार्य लगभग पूरा होने के बाद ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव हो सकते हैं. इसके साथ अटकलें भी हैं कि सीईओ जैसे पद का सृजन होता है तो नृपेंद्र मिश्र जैसी प्रशासनिक और नौकरशाही पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति की भूमिका बन सकती है. देश के शीर्ष नौकरशाहों में शामिल रहे नृपेंद्र मिश्र के बयानों को कई लोग सामान्य प्रतिक्रिया से अधिक महत्व दे रहे हैं.

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